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कसवागढ़ में पानी की मांग को लेकर IEPL Orica के खिलाफ प्रदर्शन बना आपराधिक मामला, प्रदर्शन के दौरान ओरिका समूह से जुड़े एक विदेशी नागरिक को गलत तरीके से रोकने, हमला करने समेत कई संगीन धाराओं में तीन पर नामजद केस दर्ज

गोमिया: बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत आईईएल थाना क्षेत्र के कसवागढ़ में पेयजल की समस्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन अब गंभीर कानूनी विवाद का रूप ले चुका है। 23 अप्रैल को इंडियन एक्सप्लोसिव्स प्राइवेट लिमिटेड (IEPL) ओरिका कंपनी के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन के दौरान हुई कथित घटनाओं के बाद कंपनी प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन नामजद समेत कई अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस मामले में ग्रामीणों की मांग और कंपनी के आरोपों के बीच टकराव ने पूरे इलाके में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।

FIR
FIR

पानी की समस्या से उपजा आक्रोश

कसवागढ़ गांव के ग्रामीण लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप था कि क्षेत्र में संचालित औद्योगिक इकाइ, IEPL ओरिका कंपनी प्रबंधन और प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई। इसी नाराजगी के चलते 23 अप्रैल को ग्रामीणों ने कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

घटना का विवरण: वाहन रोका, हमले का आरोप

कंपनी प्रबंधन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 23 अप्रैल की सुबह लगभग 8:30 बजे ओरिका समूह से जुड़े एक विदेशी नागरिक अपनी इनोवा कार से फैक्ट्री की ओर जा रहे थे। जब उनकी गाड़ी डी-टाइप आवासीय क्वार्टर के मुख्य द्वार के पास पहुंची, तभी 15–20 लोगों की भीड़ ने वाहन को घेर लिया और जबरन रोक दिया।

शिकायत में कहा गया है कि भीड़ का नेतृत्व मो. गौहर, चंकी बहादुर और विक्की रविदास कर रहे थे। आरोप है कि इन लोगों ने वाहन के दरवाजे खोलने की कोशिश की और अंदर बैठे विदेशी नागरिक को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई और स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखी।

सुरक्षा गार्ड के साथ मारपीट का आरोप

घटना को संभालने के लिए मौके पर मौजूद सुरक्षा गार्ड छोटू कुमार यादव ने हस्तक्षेप किया। लेकिन शिकायत के अनुसार, भीड़ ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और लाठियों से उनकी पिटाई कर दी। गंभीर रूप से घायल गार्ड किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागे।

बाद में उन्होंने मेडिकल जांच कराकर अपनी चोटों की पुष्टि की और थाने में अलग से शिकायत दर्ज कराई। इस घटना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया, क्योंकि अब यह केवल विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि हिंसा और हमले का मामला बन गया है।

घंटों तक जारी रहा तनाव

कंपनी प्रबंधन के अनुसार, घटना के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त निजी सुरक्षा बल बुलाए गए। सुबह करीब पौने 9 बजे पुलिस और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन भीड़ का आक्रामक व्यवहार दोपहर लगभग 12:30 बजे तक जारी रहा। (घटना के दिन की File Photos संलग्न है।)

इस दौरान कथित रूप से सुरक्षा कर्मियों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं और माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा। कंपनी का कहना है कि यह घटना उनके लिए सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक है।

संरक्षित क्षेत्र में घटना से बढ़ी गंभीरता

घटना स्थल झारखंड संरक्षित स्थान अधिनियम, 1979 के तहत अधिसूचित एक संरक्षित क्षेत्र में आता है। यहां विस्फोटक सामग्री का भंडारण और उपयोग होता है, जिसके कारण इस क्षेत्र में उच्च स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रहती है।

ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की घटना को प्रशासन और कंपनी दोनों ही बेहद गंभीर मान रहे हैं। सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और संभावित खतरे को देखते हुए इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

कई धाराओं में दर्ज हुई FIR

IEPL प्रबंधन के सुरक्षा प्रबंधक पंकज कुमार द्वारा आईईएल थाना में दिए गए आवेदन के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। दर्ज प्राथमिकी में आरोपियों के खिलाफ निम्नलिखित आरोप शामिल हैं:

  • गलत तरीके से रोकना (Wrongful Restraint)
  • हमला करना (Assault)
  • आपराधिक बल का प्रयोग (Criminal Force)
  • स्वेच्छा से चोट पहुंचाना (Voluntarily Causing Hurt)
  • आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation)
  • गैर-कानूनी जमावड़ा (Unlawful Assembly)
  • दंगा (Rioting)
  • उकसाना (Provocation)
  • आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy)

इसके अलावा, अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

कंपनी ने जताई चिंता

कंपनी प्रबंधन ने इस घटना को अपनी प्रतिष्ठा के लिए नुकसानदायक बताया है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं से न केवल कंपनी की छवि प्रभावित होती है, बल्कि विदेशी कर्मचारियों और मेहमानों के बीच भय का माहौल भी बनता है।

प्रबंधन ने प्रशासन से मामले में तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

ग्रामीणों का पक्ष भी अहम

हालांकि इस मामले में कंपनी की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन ग्रामीणों का पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और उनका उद्देश्य केवल पानी की समस्या का समाधान कराना था।

कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा था, जिससे मजबूर होकर उन्हें विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। वे यह भी कहते हैं कि उन पर लगाए गए आरोप अतिरंजित हैं और उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है।

प्रशासन के सामने चुनौती

यह मामला अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जहां एक ओर औद्योगिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों की बुनियादी जरूरतों और समस्याओं का समाधान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

कसवागढ़ की यह घटना केवल एक कानूनी मामला नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक विकास और स्थानीय जरूरतों के बीच संतुलन की एक बड़ी चुनौती को भी उजागर करती है। जहां एक ओर कंपनी अपनी सुरक्षा और प्रतिष्ठा को लेकर चिंतित है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में किस तरह संतुलन बनाते हुए कार्रवाई करता है और क्या इस विवाद का कोई स्थायी समाधान निकल पाता है या नहीं।

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