गोमिया: गोमिया प्रखंड के सुदूरवर्ती चुट्टे गांव की 56 महिलाओं से लोन दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के चर्चित मामले में चतरोचट्टी थाना पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। मामले के मुख्य आरोपी अजय कुमार ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद अब उसकी पत्नी और सह-आरोपी जीरू कुमारी को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

चतरोचट्टी थाना प्रभारी शशि शेखर ने बताया कि जीरू कुमारी बोकारो जिला छोड़कर किसी अन्य स्थान पर भागने की फिराक में थी। पुलिस को इसकी गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरुवार को रामगढ़ जिले के गोला टोल गेट के समीप छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान जीरू कुमारी को गिरफ्तार कर लिया गया। थाना लाकर उससे आवश्यक पूछताछ की गई, जिसके बाद उसे न्यायिक प्रक्रिया पूरी कर जेल भेज दिया गया।
थाना प्रभारी ने बताया कि इस पूरे ठगी कांड में जीरू कुमारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि महिलाओं का विश्वास जीतने, दस्तावेज जुटाने और लोन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में उसकी सक्रिय भूमिका थी। पुलिस अब इस मामले में ठगी गई कुल राशि, बैंक खातों के लेन-देन तथा अन्य संभावित सहयोगियों की भी जांच कर रही है।
पहले पति अजय कुमार ठाकुर हुआ था गिरफ्तार
गौरतलब है कि इस मामले का मुख्य आरोपी अजय कुमार ठाकुर बीते दिनों तेनुघाट कोर्ट परिसर में उस समय ग्रामीणों के हत्थे चढ़ गया था, जब वह किसी जमीन रजिस्ट्री के सिलसिले में वहां पहुंचा था। आरोपी की मौजूदगी की सूचना मिलते ही चुट्टे गांव की दर्जनों पीड़ित महिलाएं और ग्रामीण कोर्ट परिसर पहुंच गए थे। वर्षों से न्याय की मांग कर रही महिलाओं का आक्रोश उस समय फूट पड़ा और उन्होंने आरोपी को पकड़कर एक पेड़ से बांध दिया था। इस दौरान आरोपी के साथ मारपीट भी की गई थी।
घटना की सूचना पर तेनुघाट ओपी प्रभारी भजनलाल महतो पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद आरोपी को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर हिरासत में लिया। बाद में उसे चतरोचट्टी थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया था। पुलिस ने मेडिकल जांच के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।
ऐसे रचा गया था ठगी का जाल
पीड़ित महिलाओं के अनुसार, अजय कुमार ठाकुर और उसकी पत्नी जीरू कुमारी ने कम ब्याज पर बच्चों की पढ़ाई, शादी-विवाह और अन्य जरूरतों के लिए आसान शर्तों पर लोन दिलाने का लालच दिया था। इसके लिए उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करवाए थे।
महिलाओं का आरोप है कि आरोपी दंपति ने विभिन्न निजी फाइनेंस और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों से उनके नाम पर ऋण स्वीकृत कराया। शुरू में कुछ महिलाओं को छोटी राशि का लोन दिलाकर विश्वास कायम किया गया, जिससे गांव की अन्य महिलाएं भी उनके झांसे में आ गईं। बाद में बड़े पैमाने पर महिलाओं के नाम पर लोन स्वीकृत कराए गए और राशि खातों में आने के बाद उसे अपने कब्जे में ले लिया गया।
23 फरवरी को फरार हो गया था दंपति
ग्रामीणों के अनुसार, लाखों रुपये की रकम अपने कब्जे में लेने के बाद अजय कुमार ठाकुर और जीरू कुमारी 23 फरवरी को अचानक गांव छोड़कर फरार हो गए थे। इसके बाद जब माइक्रोफाइनेंस कंपनियों ने महिलाओं से ईएमआई और किश्तों की वसूली शुरू की, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि आज भी विभिन्न फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंट उनके घर पहुंचकर किश्त जमा करने का दबाव बना रहे हैं। कई महिलाओं ने मानसिक प्रताड़ना, अपमानजनक व्यवहार और लगातार दबाव बनाए जाने की शिकायत भी की है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने ऋण चुकाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
न्याय की मांग कर रही हैं पीड़ित महिलाएं
मामले के सामने आने के बाद से ही पीड़ित महिलाएं लगातार पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रही थीं। अब पति-पत्नी दोनों की गिरफ्तारी से महिलाओं ने राहत की सांस ली है। हालांकि उनका कहना है कि केवल गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि ठगी गई राशि की बरामदगी और पीड़ित महिलाओं को ऋण के बोझ से राहत दिलाने के लिए भी प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
छापेमारी टीम में शामिल रहे
जीरू कुमारी की गिरफ्तारी के लिए गठित पुलिस टीम में एसआई कुंदन कुमार यादव, आरक्षी शिवनंदन हांसदा, अजय मेहता, चौकीदार खुशबू कुमारी, तीजो कुमारी एवं विभा हांसदा सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।














