गोमिया (बोकारो)। गोमिया प्रखंड संसाधन केंद्र (BRC) में पदस्थापित एक लेखापाल सह कंप्यूटर ऑपरेटर की कार्यशैली और उपस्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि संबंधित कर्मचारी नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं होते और महीने में कभी-कभार कार्यालय पहुंचकर उपस्थिति पंजी में एक साथ कई दिनों की हाजिरी दर्ज कर देते हैं। मामले से संबंधित उपस्थिति पंजी की तस्वीरें और अन्य दस्तावेज सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।


शिकायत में गोमिया बीआरसी में पदस्थापित लेखापाल सह कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश कुमार की उपस्थिति, कार्यालय में उनकी वास्तविक कार्यस्थिति तथा उनके द्वारा किए जा रहे विभागीय कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि डिजिटल एवं बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के बावजूद यदि किसी कर्मचारी की उपस्थिति ऑफलाइन पंजी के माध्यम से दर्ज हो रही है, तो इसकी भी जांच आवश्यक है।
महीने में एक दिन उपस्थिति दर्ज करने का आरोप
प्राप्त शिकायत के अनुसार, अविनाश कुमार सिंह मई 2025 में जिला कार्यकारिणी समिति, बोकारो एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, बोकारो के आदेश के आलोक में गोमिया बीआरसी में स्थानांतरित होकर पदस्थापित हुए थे। आरोप लगाया गया है कि स्थानांतरण के बाद से वे नियमित रूप से बीआरसी में उपस्थित नहीं होते हैं।

शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित कर्मचारी न तो नियमित रूप से बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करते हैं और न ही उपस्थिति पंजी में प्रतिदिन हस्ताक्षर करते हैं। आरोप यह भी है कि महीने में कभी एक दिन गोमिया बीआरसी पहुंचकर उपस्थिति पंजी में एक साथ कई दिनों की उपस्थिति दर्ज कर दी जाती है तथा कुछ प्रविष्टियों में ‘DLO’, ‘DSE’ अथवा ‘जिला कार्यालय’ का उल्लेख किया जाता है।

सामने आए दस्तावेजों और तस्वीरों को लेकर शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उपस्थिति पंजी में कुछ दिनों के कॉलम खाली रहने के बाद एक ही समय में कई प्रविष्टियां की गई हैं।
संवाददाता कार्यालय पहुंचा तो बीआरसी मिला बंद

मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जब संवाददाता गोमिया प्रखंड संसाधन केंद्र पहुंचा, तो कार्यालय बंद मिला। इसके बाद संबंधित कर्मचारी अविनाश कुमार से फोन पर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया। कई बार संपर्क करने के बावजूद उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

ऐसे में संबंधित कर्मचारी का पक्ष फिलहाल सामने नहीं आ सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
बीआरसी के कामकाज पर असर का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित कर्मचारी की नियमित अनुपस्थिति के कारण बीआरसी से जुड़े कई वित्तीय एवं विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पदस्थापित बीपीओ इकबाल अतहर वारसी के अनुसार, इस संबंध में पूर्व में भी वरीय पदाधिकारी ADPO को अवगत कराया जा चुका है।

उनका कहना है कि बीआरसी से जुड़े यूनिफॉर्म डाटा, मुख्यमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना (सीएम स्कॉलरशिप) का डाटा, स्कूल किट का डाटा, सहायक अध्यापक/पारा शिक्षकों के वेतन तथा अन्य वित्तीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, इन कार्यों के लंबित रहने के लिए किसी एक कर्मचारी की अनुपस्थिति को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने से पहले विभागीय जांच आवश्यक होगी।
पूर्व बीईईओ की भूमिका को लेकर भी लगाए गए आरोप
शिकायत में तत्कालीन प्रभारी बीईईओ कानन कुमार पात्र की भूमिका को लेकर भी कई आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कथित तौर पर संबंधित लेखापाल को गोमिया बीआरसी के बजाय चास स्थित निजी आवास से विभागीय कार्य कराने की व्यवस्था की गई थी।
यह भी आरोप लगाया गया है कि चास स्थित आवास से शिक्षकों को स्पष्टीकरण, वेतन रोकने अथवा अन्य विभागीय पत्र जारी किए जाते थे तथा इन पत्राचारों के माध्यम से शिक्षकों पर दबाव बनाया जाता था। शिकायत में कथित अवैध वसूली के आरोप भी लगाए गए हैं।
हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र अथवा विभागीय पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए आरोपों की सत्यता निर्धारित करने के लिए दस्तावेजों, आदेशों, उपस्थिति रिकॉर्ड तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान की जांच आवश्यक है।

कानन कुमार पात्र के स्थानांतरण के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं होने का दावा
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, तत्कालीन प्रभारी बीईईओ कानन कुमार पात्र का स्थानांतरण हो चुका है। उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों के संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशालय, रांची स्तर पर कार्रवाई के लिए मामला भेजे जाने की बात भी कही गई है।
बताया गया कि उनका मूल पदस्थापन बीआरसी नावाडीह में था और वे गोमिया सहित बेरमो, चंदनकियारी तथा बोकारो के अतिरिक्त प्रभार में भी रहे थे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके स्थानांतरण के बाद उम्मीद थी कि गोमिया बीआरसी की कार्यप्रणाली में सुधार होगा, लेकिन लेखापाल की अनुपस्थिति के कारण स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और तकनीकी जांच की मांग
मामले में शिकायतकर्ताओं ने लेखापाल अविनाश कुमार के बायोमेट्रिक लॉगिन, उपस्थिति रिकॉर्ड, जीपीएस लोकेशन और संबंधित सिस्टम के आईपी एड्रेस की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे यह स्पष्ट किया जा सकता है कि संबंधित कर्मचारी ने किन स्थानों से विभागीय सिस्टम पर लॉगिन किया और किस अवधि में उनकी वास्तविक उपस्थिति कहां रही।
यदि विभाग इस मामले में जांच करता है तो बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, उपस्थिति पंजी, कार्यालय आदेश, लॉगिन हिस्ट्री और संबंधित कार्यों के डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है।

अधिकारियों ने क्या कहा?
इस मामले में गोमिया की नवपदस्थापित बीईईओ प्रतिमा दास से पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन कॉल का जवाब नहीं मिला।
वहीं जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) डॉ. अतुल चौबे ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि उक्त लेखापाल अविनाश कुमार सिंह जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के अधीन हैं और इस संबंध में DEO से बात करने की बात कही।
जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) प्रवीन रंजन ने भी मामले में विस्तृत जानकारी नहीं होने की बात कही। हालांकि, उन्होंने आरोपों की संक्षिप्त विवरणी मांगी है, ताकि मामले में कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
वहीं अतिरिक्त जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (ADPO) उदय कुमार सिंह से जब लेखापाल की अन्यत्र प्रतिनियुक्ति से संबंधित जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी DSE को है। उन्होंने मामले की जानकारी लेने की बात कही। साथ ही कहा कि यदि मामला सही पाया जाता है तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा।
जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविक स्थिति
मामले में एक ओर जहां शिकायतकर्ताओं ने कर्मचारी की कथित अनुपस्थिति, उपस्थिति पंजी में एक साथ हाजिरी दर्ज करने तथा बीआरसी के कार्य प्रभावित होने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारियों ने फिलहाल मामले की विस्तृत जानकारी नहीं होने की बात कही है और जांच की दिशा में जानकारी जुटाने की बात कही है।
फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और संबंधित कर्मचारी का पक्ष सामने आना बाकी है।














