गोमिया (बोकारो): गोमिया प्रखंड के तिलैया पंचायत सहित आसपास के डाका साड़म, सहेदा, जगेश्वर, कुंदा आदि गांवों में पिछले तीन दिनों से हाथियों के झुंड ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। करीब 13 से 15 हाथियों का झुंड, जिसमें दो हाथी के बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं, लगातार खेतों में पहुंचकर धान की खड़ी फसलों को रौंदने और खाने से किसानों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। हाथियों के लगातार विचरण से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीण किसानों के अनुसार हाथियों का झुंड रात के समय खेतों में पहुंच रहा है और देखते ही देखते तैयार हो रही धान की फसलों को रौंदकर नष्ट कर दे रहा है। कई खेतों में हाथियों ने फसल को खाने के साथ-साथ पैरों से रौंद दिया है, जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि धान की फसल उनके लिए आय का प्रमुख साधन है और फसल बर्बाद होने से उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
दर्जनों किसानों की धान की फसल प्रभावित
हाथियों के उत्पात से प्रभावित किसानों में चतुर्भुज प्रजापति, बिगन प्रजापति, फुलमुनी देवी, चरकी देवी, छोटी प्रजापति, गोपाल प्रजापति, बुधन प्रजापति, गोवर्धन प्रजापति, पूरण मांझी, जागो रविदास, बासुदेव रविदास, तालो मांझी सहित तिलैया के मोहन महतो, धनीलाल महतो, बृज भूषण महतो, टेपा महतो, धनेश्वर महतो, रियासत अंसारी, मुबारक अंसारी, मुर्तुज अंसारी, हासिम अंसारी और बिगन मांझी समेत कई अन्य किसान बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार हाथियों के झुंड ने अलग-अलग खेतों में लगी धान की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। कई किसानों की मेहनत से तैयार हो रही फसल हाथियों के पैरों तले कुचल गई है। इससे किसानों को फसल उत्पादन के साथ-साथ आगामी दिनों में होने वाली आय का भी नुकसान होने की चिंता सता रही है।

तीन दिनों से लगातार गांवों में पहुंच रहा हाथियों का झुंड
किसान चतुर्भुज प्रजापति, गोपाल प्रजापति सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पिछले करीब तीन दिनों से हाथियों का झुंड क्षेत्र में लगातार घूम रहा है। झुंड में करीब 13 से 15 हाथी हैं, जिनमें दो छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हाथियों का झुंड कभी खेतों में तो कभी गांव के आसपास के इलाकों में पहुंच जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के आने की जानकारी मिलते ही लोग अपने स्तर से उन्हें खेतों और आबादी वाले क्षेत्र से दूर भगाने का प्रयास करते हैं, लेकिन हाथियों की संख्या अधिक होने के कारण ग्रामीणों के लिए उन्हें नियंत्रित करना जोखिम भरा है। रात के समय हाथियों की मौजूदगी के कारण ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं।

वन विभाग को सूचना देने के बावजूद क्षति आकलन नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के झुंड द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने की सूचना वन विभाग को दी गई है। इसके बावजूद अब तक फसलों के नुकसान का उचित आकलन नहीं किया गया है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते विभागीय कर्मियों द्वारा प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर क्षति का आकलन किया जाता है तो किसानों को सरकारी प्रावधान के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में सुविधा होगी।
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल टीम भेजकर हाथियों के झुंड की गतिविधियों पर नजर रखी जाए और हाथियों को सुरक्षित तरीके से आबादी एवं खेतों से दूर जंगल की ओर खदेड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

मुआवजा और सुरक्षा की मांग
प्रभावित किसानों ने वन विभाग से हाथियों द्वारा नष्ट की गई धान की फसलों का शीघ्र सर्वेक्षण कर क्षति का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि उन्होंने खेती में अपनी मेहनत और पूंजी लगाई है। ऐसे में हाथियों द्वारा फसल नष्ट किए जाने के बाद यदि समय पर सरकारी सहायता नहीं मिलती है तो उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि हाथियों का झुंड यदि इसी तरह आबादी वाले क्षेत्रों और खेतों में पहुंचता रहा तो भविष्य में जान-माल का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। इसलिए वन विभाग को केवल फसल क्षति का आकलन करने तक सीमित न रहकर हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और ग्रामीणों को सतर्क करने की व्यवस्था करनी चाहिए।
ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द कार्रवाई करते हुए हाथियों के झुंड को आबादी से दूर रखने, प्रभावित किसानों की फसल क्षति का सर्वे कराने तथा पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।














