गोमिया (बोकारो): गोमिया प्रखंड अंतर्गत बड़की सीधाबारा पंचायत के रोला दक्षिण माटकम क्षेत्र से रोला होते हुए ऐदला-हरली तक जाने वाले मार्ग के आसपास इन दिनों कथित रूप से बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई किए जाने का मामला सामने आया है। क्षेत्र में लगातार पेड़ों की कटाई से जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं जंगल पर निर्भर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रोला दक्षिण माटकम क्षेत्र से लेकर ऐदला-हरली मार्ग के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में पेड़ों को काट दिया गया है। मौके पर कई अवयस्क एवं छोटे पेड़ों के कटे हुए ठूंठ दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि जंगल से पेड़ों की कटाई करने के बाद लकड़ियों को ट्रैक्टर सहित अन्य वाहनों के माध्यम से बाहर ले जाया जाता है और इसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।

जंगल में कटे पड़े हैं कई पेड़
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध कटाई पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले दिनों में जंगल का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा है। जंगल क्षेत्र में पेड़ों की कटाई का सीधा असर पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के आश्रय स्थल पर भी पड़ रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि लकड़ी कटाई से जुड़े लोग जंगल के विभिन्न हिस्सों में पेड़ों को चिन्हित कर उनकी कटाई करते हैं और बाद में लकड़ियों को वाहनों के माध्यम से दूसरे स्थानों तक पहुंचाया जाता है। हालांकि, इस संबंध में किन लोगों द्वारा कितने स्तर पर पेड़ों की कटाई की जा रही है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
वन विभाग की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
अवैध पेड़ कटाई को लेकर स्थानीय लोगों के बीच वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से इस प्रकार की गतिविधियां संचालित होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लकड़ी कारोबारियों का मनोबल बढ़ रहा है। कुछ लोगों ने वन विभाग के स्थानीय पदाधिकारियों की कथित संलिप्तता के आरोप भी लगाए हैं।
हालांकि, वन विभाग के किसी अधिकारी की संलिप्तता के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस आरोप की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वन विभाग द्वारा यदि मामले की जांच की जा रही है तो अवैध कटाई में शामिल लोगों के साथ-साथ लकड़ी के परिवहन और संभावित संरक्षण की भूमिका की भी जांच किए जाने की जरूरत है।

फोरेस्टर ने कहा- लकड़ियां जब्त करने की कार्रवाई जारी
मामले को लेकर फोरेस्टर विकास कुमार ने बताया कि क्षेत्र में मौजूद अवैध रूप से काटी गई लकड़ियों को जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच भी की जा रही है कि पेड़ों की कटाई और लकड़ी के कारोबार में कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा इसमें कितने लोगों की संलिप्तता है।
वन विभाग की ओर से की जा रही जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पेड़ों की कटाई किस क्षेत्र में और कितने स्तर पर हुई है तथा काटी गई लकड़ियों को कहां ले जाया जा रहा था। इसके अलावा यदि जांच के दौरान अवैध कटाई या परिवहन से जुड़े साक्ष्य सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकता है जंगल पर दबाव
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई पर तत्काल और प्रभावी रोक लगाना जरूरी है। यदि अवैध रूप से पेड़ों की कटाई और लकड़ी का परिवहन जारी रहा तो आने वाले समय में वन क्षेत्र का स्वरूप प्रभावित हो सकता है। ग्रामीणों ने वन विभाग से नियमित गश्त बढ़ाने, काटे गए पेड़ों का आकलन करने तथा अवैध लकड़ी परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की जांच करने की मांग की है।
फिलहाल वन विभाग द्वारा लकड़ियों की जब्ती और मामले में संलिप्त लोगों की पहचान को लेकर जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ों की कटाई का वास्तविक दायरा कितना है और इस अवैध कारोबार में कौन-कौन लोग शामिल हैं।















