गोमिया। झारखंड आंदोलनकारियों की विभिन्न मांगों को लेकर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने एक बार फिर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में सोमवार को गोमिया बैंक मोड़ स्थित कार स्टैंड में प्रखंड इकाई की आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक में आंदोलनकारियों की लंबित मांगों, सरकार की ओर से अब तक की गई पहल तथा आगामी आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद मोर्चा ने 29 सितंबर की शाम गोमिया में मशाल जुलूस निकालने और 30 सितंबर को झारखंड बंद का समर्थन करने की घोषणा की।
बैठक की अध्यक्षता झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के प्रखंड अध्यक्ष कुलेश्वर पासवान ने की। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर आंदोलनकारियों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी के तहत 29 सितंबर की शाम पांच बजे गोमिया में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। इसके अगले दिन 30 सितंबर को सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक झारखंड बंद का आह्वान किया गया है।
इस संबंध में मोर्चा की ओर से बेरमो एसडीएम को लिखित सूचना पत्र सौंपा गया है। पत्र में मशाल जुलूस एवं बंद कार्यक्रम की जानकारी देते हुए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्था की मांग की गई है। संगठन ने पत्र की प्रतिलिपि गोमिया थाना एवं आईईएल थाना के प्रभारी को भी दी है।

26 वर्ष बाद भी कई मांगें लंबित होने का दावा
प्रखंड अध्यक्ष कुलेश्वर पासवान ने कहा कि झारखंड अलग राज्य के गठन को लगभग 26 वर्ष हो चुके हैं। अलग राज्य के निर्माण में झारखंड आंदोलनकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, लेकिन इतने लंबे समय बाद भी आंदोलनकारियों की कई प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो सकी हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को पूर्व में सम्मानित किया गया है, लेकिन केवल सम्मान से उनकी आर्थिक एवं सामाजिक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
मोर्चा का कहना है कि आंदोलनकारियों के जीवन की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें सम्मानजनक और स्थायी आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है। संगठन ने सभी आंदोलनकारियों को समान रूप से 50-50 हजार रुपये प्रतिमाह सम्मान पेंशन देने की मांग की है। इसके अलावा आंदोलनकारियों के आश्रितों को नियोजन, परिवार के लिए समूह स्वास्थ्य बीमा, पक्का मकान समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।
आश्रितों को नियोजन और स्वास्थ्य बीमा की मांग
मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि कई आंदोलनकारी आर्थिक कठिनाइयों के बीच जीवन गुजार रहे हैं। ऐसे में उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। संगठन ने आंदोलनकारियों के आश्रितों को नियोजन देने तथा उनके परिवारों को समूह स्वास्थ्य बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसके साथ ही जरूरतमंद आंदोलनकारियों के परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। संगठन का कहना है कि आंदोलनकारियों के योगदान को केवल प्रतीकात्मक सम्मान तक सीमित रखने के बजाय उनके परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी प्रभावी पहल होनी चाहिए।
29 सितंबर को मशाल जुलूस, 30 को बंद
बैठक में तय कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर की शाम पांच बजे गोमिया में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। इसके माध्यम से आंदोलनकारी अपनी मांगों के समर्थन में लोगों का ध्यान आकर्षित करेंगे। इसके बाद 30 सितंबर को सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक झारखंड बंद का आह्वान किया गया है।
मोर्चा ने कहा है कि बंद के दौरान आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को मुक्त रखा जाएगा। संगठन की ओर से प्रशासन को इसकी जानकारी भी दी गई है। मोर्चा का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य अपनी मांगों को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना और लंबित मांगों पर सकारात्मक पहल के लिए दबाव बनाना है।
केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर आंदोलन
प्रखंड अध्यक्ष कुलेश्वर पासवान ने कहा कि केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर आंदोलनकारियों को अपनी मांगों के समर्थन में दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान को लेकर संगठन लगातार आवाज उठाता रहा है। यदि मांगों पर अपेक्षित पहल नहीं हुई तो आंदोलन को आगे भी चरणबद्ध तरीके से जारी रखने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
बैठक में उपस्थित आंदोलनकारियों ने एकजुट होकर आगामी कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प लिया। साथ ही अधिक से अधिक आंदोलनकारियों से 29 सितंबर को मशाल जुलूस में शामिल होने और 30 सितंबर के बंद कार्यक्रम को समर्थन देने की अपील की गई।
बैठक का सफल संचालन दरबारी मांझी ने किया। मौके पर प्रखंड सचिव लवनाथ देव, उपाध्यक्ष वीर सिंह बेसरा, श्यामदेव सोरेन, शिवशंकर पासवान, अनिल कुमार, रामेश्वर यादव, निर्मल रजवार, हरिहर नाथ प्रजापति, वरुण प्रजापति, विनेश रविदास, विनोद रविदास, महेश रविदास, रामचंद्र गंझू, हीरालाल मांझी, दुलारचंद नायक, राजकुमार नोनिया सहित अन्य आंदोलनकारी मौजूद थे।














