गोमिया। साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को अलग-अलग सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर डराने और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में बोकारो साइबर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 4 लाख 50 हजार रुपये की कथित ठगी करने वाले दो आरोपियों को उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रवि कुमार (23 वर्ष) और ऋतिक कुशवाहा (21) के रूप में की गई है।

मामला गोमिया निवासी पुष्पलता त्रिपाठी से जुड़ा है। मार्च 2026 में साइबर ठगी का शिकार होने के बाद उन्होंने बोकारो साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर साइबर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचते हुए आगरा से दोनों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
इस संबंध में मुख्यालय डीएसपी पवन कुमार ने प्रेस बयान जारी कर पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच के दौरान सामने आए तकनीकी साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
महाराष्ट्र ATS का अधिकारी बनकर किया फोन
पीड़ित परिवार के अनुसार, साइबर अपराधियों ने खुद को महाराष्ट्र एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) का अधिकारी बताकर फोन किया था। कॉल के दौरान साइबर अपराधियों ने परिवार को गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने का भय दिखाया। कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि उनके पति गिरीश दत्त त्रिपाठी के बैंक खाते में पाकिस्तान के एक खाते से 300 करोड़ रुपये की राशि आई है।
इतनी बड़ी रकम के पाकिस्तान से जुड़े होने की बात कहकर साइबर अपराधियों ने परिवार को और अधिक भयभीत किया तथा कथित तौर पर कहा कि इस मामले में उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। अचानक आए इस तरह के फोन और गंभीर आरोपों से परिवार घबरा गया।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों ने इसी डर का फायदा उठाकर पीड़ित परिवार से 4 लाख 50 हजार रुपये की राशि अपने खाते में ट्रांसफर करा ली।
पत्नी की बीमारी के बीच आया था साइबर अपराधियों का फोन
पीड़ित गिरीश दत्त त्रिपाठी ने बताया कि घटना मार्च 2026 की है। उस समय उनकी पत्नी पुष्पलता त्रिपाठी की तबीयत खराब थी। इसी दौरान साइबर अपराधियों ने फोन कर उन्हें कथित तौर पर महाराष्ट्र एटीएस का अधिकारी बताया और बैंक खाते में पाकिस्तान से 300 करोड़ रुपये आने की बात कही।
गिरीश दत्त त्रिपाठी के अनुसार, साइबर अपराधियों ने कार्रवाई और डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाया। परिवार पहले से ही पत्नी की बीमारी को लेकर परेशान था और अचानक इस तरह की धमकी मिलने के बाद वे काफी घबरा गए। इसी डर और दबाव में उन्होंने साइबर अपराधियों द्वारा बताए गए तरीके से 4.50 लाख रुपये की राशि ट्रांसफर कर दी।
बाद में जब उन्हें महसूस हुआ कि उनके साथ साइबर ठगी हुई है, तो उन्होंने इसकी शिकायत बोकारो साइबर थाना में दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। बताया कि साइबर पुलिस के माध्यम से जानकारी दी गई है कि राशि रिकवरी में कुछ समय और लगेगा।
तकनीकी जांच के बाद आगरा तक पहुंची पुलिस
शिकायत दर्ज होने के बाद साइबर थाना पुलिस ने मामले की तकनीकी जांच शुरू की। पुलिस ने कथित ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर, बैंक खाते और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। जांच के क्रम में पुलिस टीम को आरोपियों से संबंधित महत्वपूर्ण सुराग मिले।
इसके बाद पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में कार्रवाई करते हुए रवि कुमार और ऋतिक कुशवाहा को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को बोकारो लाया गया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस का कहना है कि मामले में साइबर ठगी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों का इस तरह की अन्य साइबर ठगी की घटनाओं से कोई संबंध है या नहीं।
अनुसंधानकर्ता गौरव गोयल की रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस मामले के उद्भेदन में कांड के अनुसंधानकर्ता पुअनि गौरव गोयल की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। उनके नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया और आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
कार्रवाई में पुअनि प्रमोद कुमार पंडित, रमेश कुमार, आरक्षी रितेश कुमार और सुनील मंडल का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। पुलिस टीम द्वारा विभिन्न स्तरों पर जुटाए गए तकनीकी एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी संभव हो सकी।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से रहें सावधान
इस घटना ने एक बार फिर साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे डिजिटल अरेस्ट के तरीके को उजागर किया है। साइबर अपराधी अक्सर पुलिस, सीबीआई, ईडी, एटीएस या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। इसके बाद किसी आपराधिक मामले में फंसाने, बैंक खाते में अवैध रकम आने या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप लगाकर पीड़ित को डराया जाता है।
इसके बाद वीडियो कॉल या फोन पर लगातार संपर्क बनाए रखते हुए कथित तौर पर गिरफ्तारी अथवा डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाया जाता है और पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया जाता है।
ऐसी स्थिति में किसी भी व्यक्ति को घबराने के बजाय संबंधित सरकारी एजेंसी या स्थानीय पुलिस से सीधे संपर्क करना चाहिए। किसी भी सरकारी जांच एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से इस तरह बैंक खाते में रकम भेजने का दबाव बनाए जाने पर तुरंत इसकी सूचना पुलिस को देना जरूरी है।
बोकारो साइबर थाना पुलिस की इस कार्रवाई से एक ओर जहां डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कथित ठगी करने वाले दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, वहीं दूसरी ओर यह मामला लोगों के लिए भी सतर्क रहने का संदेश देता है कि अनजान फोन कॉल पर सरकारी अधिकारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति के दबाव में आकर किसी भी खाते में रकम ट्रांसफर न करें।















