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Gomia: खुद को फंसता देख रातोंरात जेसीबी से डोभा खुदवाने का आरोप

जीओ टैग वाली जगह पर आनन-फानन में खुदाई कराने का दावा, लाभुक ने वीडियो जारी कर पंचायत सेवक और जेई पर लगाए गंभीर आरोप

Mahuatand JCB

गोमिया। महुआटांड़ पंचायत में BV-G-RAM-G (मनरेगा) के तहत स्वीकृत व्यक्तिगत डोभा निर्माण को लेकर सामने आए विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। योजना के स्थल पर डोभा निर्माण नहीं होने की शिकायत के बाद मंगलवार की रात आनन-फानन में जेसीबी मशीन से डोभा खुदवाए जाने का आरोप लगाया गया है। लाभुक ने इस संबंध में एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें कथित रूप से जेसीबी से डोभा की खुदाई किए जाने का दावा किया गया है।

लाभुक का आरोप है कि शिकायत के बाद मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने और जांच की संभावना बढ़ने पर संबंधित पंचायत सेवक और जेई द्वारा खुद को बचाने के लिए जीओ टैग में दर्ज स्थल पर रात में ही जेसीबी लगाकर डोभा की खुदाई कराई गई। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

कागजों में पूरा था डोभा, धरातल पर नहीं होने की शिकायत

गौरतलब है कि महुआटांड़ पंचायत के महुआटांड़ गांव निवासी उषा देवी की जमीन पर मनरेगा के तहत व्यक्तिगत डोभा निर्माण की योजना स्वीकृत की गई थी। योजना का वर्क कोड 3420005023/IF/7080903956473 है। योजना की प्राक्कलित राशि 3.79885 लाख रुपये बताई गई है।

लाभुक ने गोमिया प्रखंड विकास पदाधिकारी को दिए आवेदन में आरोप लगाया था कि संबंधित योजना के एसेट रजिस्टर और मस्टर रोल में कार्य पूरा दिखाया गया है तथा मजदूरी मद में राशि का भुगतान भी कर दिया गया है। जबकि वास्तविकता में उनकी जमीन पर डोभा का निर्माण नहीं हुआ था।

शिकायत में लाभुक ने आरोप लगाया था कि उनकी जानकारी के बिना मस्टर रोल के माध्यम से राशि का भुगतान कराया गया। आवेदन में 1 लाख 59 हजार 894 रुपये की निकासी का भी उल्लेख किया गया है। लाभुक ने इस मामले में स्थल निरीक्षण और अभिलेखों की जांच की मांग की थी।

शिकायत के बाद रात में जेसीबी चलने का दावा

अब लाभुक की ओर से जारी किए गए वीडियो ने पूरे मामले को और तूल दे दिया है। लाभुक का दावा है कि शिकायत किए जाने के बाद मंगलवार रात संबंधित स्थल पर जेसीबी मशीन पहुंची और आनन-फानन में डोभा की खुदाई शुरू कर दी गई।

लाभुक का आरोप है कि यदि डोभा पहले से निर्मित था, तो शिकायत के बाद रात में जेसीबी लगाकर उसकी खुदाई कराने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को मामले में संभावित गड़बड़ी को छिपाने अथवा कागजी रिकॉर्ड को धरातल की स्थिति से मिलाने की कोशिश बताया है।

हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही खुदाई वास्तव में इसी मनरेगा योजना के तहत कराई गई है या किसी अन्य कार्य के लिए, यह जांच का विषय है। साथ ही जेसीबी से काम कराने की स्थिति में मनरेगा के नियमों का पालन हुआ या नहीं, यह भी जांच के दायरे में आएगा।

रोजगार सेवक पहले ही बता चुके हैं- स्थल परिवर्तन हुआ

इस मामले में महुआटांड़ पंचायत के रोजगार सेवक एकराम शमशी ने पहले कहा था कि डोभा का निर्माण किया गया है। हालांकि, उनके अनुसार लाभुक और मुखिया की सहमति से डोभा का स्थल परिवर्तन हुआ है।

रोजगार सेवक के इस बयान के बाद अब सवाल उठ रहा है कि यदि स्वीकृत स्थल बदलकर दूसरे स्थान पर डोभा बनाया गया था, तो इसके लिए विभागीय स्तर पर अनुमति ली गई थी या नहीं। वहीं, अब लाभुक द्वारा जीओ टैग वाली जगह पर रात में जेसीबी से खुदाई कराए जाने का आरोप लगाए जाने के बाद मामले की तकनीकी जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

मुखिया ने कहा- लाभुक को थी पूरी जानकारी

इधर पंचायत की मुखिया बुधनी देवी और उनके पति फूलचंद केवट ने लाभुक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि लाभुक को योजना से जुड़ी सभी चीजों की जानकारी थी। उनका कहना है कि अब लाभुक अपनी बात से पलट गई हैं और शिकायत कर रही हैं।

वहीं, पंचायत सेवक विवेक कुमार ने कहा था कि वे फिलहाल एसआईआर के कार्य में व्यस्त हैं। मामले की जांच करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब इन बिंदुओं पर जांच जरूरी

मामले में अब प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे पहले यह जांच जरूरी है कि जीओ टैग किस स्थान का है और वहां डोभा कब बनाया गया। यदि डोभा मंगलवार रात या शिकायत के बाद बनाया गया है तो इससे पहले के एसेट रजिस्टर और मस्टर रोल में कार्य पूर्ण दिखाए जाने का आधार क्या था।

इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि मजदूरों के नाम से जारी मस्टर रोल में दर्ज कार्य वास्तव में हुआ था या नहीं, मजदूरी का भुगतान किन खातों में हुआ, स्थल परिवर्तन की अनुमति किस स्तर से मिली और यदि रात में जेसीबी से खुदाई कराई गई तो मशीन का इस्तेमाल किसकी अनुमति से हुआ।

मनरेगा कार्यों में मशीन के इस्तेमाल को लेकर भी नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है। इसलिए प्रशासन द्वारा मस्टर रोल, एसेट रजिस्टर, जियो टैग फोटो, कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन, भुगतान विवरण और योजना से जुड़े तकनीकी अभिलेखों की जांच कराए जाने से ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

फिलहाल लाभुक द्वारा जारी वीडियो और लगाए गए आरोपों ने महुआटांड़ पंचायत की इस मनरेगा योजना को लेकर विवाद और गहरा दिया है। अब निगाहें प्रखंड प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि शिकायत के बाद रात में हुई कथित खुदाई की वास्तविकता क्या है और यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

इधर लाभुक ने कहा है कि मामले को लेकर उन्होंने गोमिया बीडीओ के बाद बोकारो के उप विकास आयुक्त शताब्दी मजुमदार को भी अवगत कराया है और लिखित में शिकायत दर्ज कराई है, देखना है कि अब आगे क्या कारवाई होती है।

नोट: Khabarlink.in News Portal प्रसारित वीडियो / स्क्रीनशॉट की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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