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कोनार डैम में भटककर पहुँचा हिरन, मछुआरों की सूझबूझ से हुआ सुरक्षित रेस्क्यू, वन विभाग को सौंपा गया

गोमिया: भीषण गर्मी के चलते जलस्रोतों के सूखने और तापमान में लगातार वृद्धि का असर अब जंगलों के वन्यजीवों पर भी साफ दिखने लगा है। इसी कड़ी में एक नर हिरन पानी की तलाश में भटकते हुए गोमिया प्रखंड के जरकुंडा स्थित कोनार डैम जलाशय तक पहुँच गया, जहाँ अधिक पानी में फंस जाने के कारण उसकी जान पर बन आई। हालांकि स्थानीय मछुआरों की सतर्कता और मानवता के चलते समय रहते उसका रेस्क्यू कर लिया गया और बाद में वन विभाग को सौंप दिया गया।

धीरज लहेरी, देंवेद्र महतो, के अनुसार वे कोनार डैम के आसपास मछली पकड़ने के लिए गए तभी उनकी नजर अचानक पानी के बीचों-बीच संघर्ष करते एक नर हिरन पर पड़ी। शुरुआत में उन्हें लगा कि कोई जानवर तैरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि वह हिरन है जो पानी की गहराई में फंस गया है और बाहर निकलने के लिए जूझ रहा है। भीषण गर्मी के कारण संभवतः वह पानी पीने के लिए डैम तक आया होगा, लेकिन किनारे की ढलान और पानी की अधिक गहराई के कारण वह वापस बाहर नहीं निकल पाया।

स्थिति को समझते हुए मछुआरों ने तुरंत मानवीय पहल दिखाई वन विभाग के वनरक्षी को इसकी सुचना दी। बिना समय गंवाए उन्होंने अपनी नाव (बोट) तैयार की और कुछ लोग उसे बचाने के लिए डैम के अंदर की ओर बढ़े। पानी में डूबते-उतराते और घबराहट में इधर-उधर तैरते हिरन को नियंत्रित करना आसान नहीं था। वह काफी डरा हुआ था और खुद को बचाने की कोशिश में तेजी से हिल-डुल रहा था। ऐसे में मछुआरों ने काफी सावधानी बरतते हुए उसे धीरे-धीरे नाव के पास लाने का प्रयास किया।

काफी देर की मशक्कत के बाद मछुआरों ने हिरन को सुरक्षित तरीके से काबू में किया और उसे नाव के सहारे किनारे तक ले आए। इस दौरान उन्होंने इस बात का विशेष ध्यान रखा कि हिरन को कोई चोट न लगे और वह और अधिक तनाव में न आए। किनारे पर लाने के बाद हिरन थका हुआ और घबराया हुआ दिख रहा था। कुछ देर तक उसे वहीं आराम करने दिया गया ताकि वह सामान्य स्थिति में आ सके।

घटना की जानकारी मिलते ही जमुना महतो, अशोक महतो, नीरज लहेरी, भुनेश्वर महतो, पूनम देवी, काली महतो, बिनोद राम, चरकू रविदास सहित आसपास के ग्रामीण भी मौके पर जुट गए। सभी ने मछुआरों के इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा की। वहीं, स्थानीय लोगों ने तुरंत जरकुंडा वन विभाग को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही वनरक्षी मौके पर पहुंछे और हिरन को अपने कब्जे में लिया।

वनरक्षी विकार कुमार ने बताया कि प्राथमिक जांच के दौरान पाया कि हिरन को कोई गंभीर चोट नहीं लगी है, लेकिन वह अत्यधिक थकान और भय की स्थिति में था। इसके बाद विभागीय टीम ने उसे आवश्यक देखभाल के लिए सुरक्षित स्थान पर ले जाने की व्यवस्था में जुटी है। बताया गया कि स्वास्थ्य जांच और निगरानी के बाद उसे फिर से जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि गर्मी के मौसम में जंगलों में पानी की कमी किस तरह वन्यजीवों को मानव बस्तियों और जलाशयों की ओर आने को मजबूर कर रही है। कोनार डैम जैसे बड़े जलस्रोत जानवरों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं, लेकिन कई बार उनकी संरचना और गहराई उनके लिए खतरा भी बन जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में जलस्रोतों का संरक्षण और कृत्रिम जलाशयों का निर्माण अत्यंत आवश्यक है, ताकि वन्यजीवों को पानी के लिए भटकना न पड़े। साथ ही, ऐसे क्षेत्रों में जहां डैम या बड़े जलाशय हैं, वहां वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए जाने चाहिए।

स्थानीय ग्रामीणों और मछुआरों की भूमिका भी ऐसे मामलों में बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस घटना में जिस तरह मछुआरों ने बिना किसी भय के अपनी जान जोखिम में डालकर हिरन की जान बचाई, वह काबिले-तारीफ है। यह मानव और प्रकृति के बीच सहअस्तित्व और संवेदनशीलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए निगरानी बढ़ाई जाए और समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि ऐसे मामलों में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

कुल मिलाकर, यह घटना जहां एक ओर गर्मी के दुष्प्रभाव और वन्यजीवों की परेशानी को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखाती है कि यदि इंसान संवेदनशीलता और तत्परता दिखाए, तो कई मासूम जानवरों की जान बचाई जा सकती है। मछुआरों की इस बहादुरी और मानवता भरे कार्य की जितनी सराहना की जाए, वह कम है।

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