बोकारो। जमुनिया नदी में बोरे में बंद एक महिला का शव मिलने से मचे हड़कंप के मामले का पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। चंद्रपुरा थाना क्षेत्र के तरंगा पंचायत अंतर्गत चिरूबाद गांव के समीप 23 अप्रैल को मिले इस शव की पहचान चास निवासी बेबी देवी के रूप में हुई। जांच में सामने आया कि महिला की हत्या उसके ही व्यावसायिक पार्टनर ने आपसी विवाद के चलते 40 हजार रुपये की सुपारी देकर कराई थी। इस पूरे मामले में पुलिस ने कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
बेरमो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बशिष्ठ नारायण सिंह ने शनिवार को अपने कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक बोकारो के निर्देश पर तत्काल एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। टीम ने तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल्स, मोबाइल लोकेशन और गुप्त सूचना के आधार पर तेजी से कार्रवाई करते हुए मामले की गुत्थी सुलझा ली।

कैसे सामने आया मामला
23 अप्रैल 2026 को स्थानीय लोगों ने चिरूबाद गांव के पास जमुनिया नदी में एक बोरे में बंद महिला का शव तैरता हुआ देखा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नदी से बाहर निकालकर कब्जे में लिया। प्रारंभिक जांच में शव की पहचान नहीं हो सकी, जिसके बाद उसे पहचान के लिए डीवीसी अस्पताल, चंद्रपुरा के शवगृह में सुरक्षित रखा गया।
इसी दौरान पुलिस ने आसपास के थानों में हाल के दिनों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों की जांच शुरू की। जांच के क्रम में यह जानकारी मिली कि चास थाना क्षेत्र से 20 अप्रैल को एक महिला बेबी देवी के लापता होने की सूचना दर्ज हुई थी। इसके बाद मृतका के परिजनों को बुलाया गया, जिन्होंने शव की पहचान बेबी देवी के रूप में की।
संदेह से साजिश तक: पुलिस की जांच
शव की पहचान होने के बाद मृतका के पति और परिजनों ने उसके व्यावसायिक पार्टनर गुड्डू वर्णवाल उर्फ मुकेश पर संदेह जताया। पुलिस ने इस आधार पर उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआत में आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के सामने वह ज्यादा देर टिक नहीं सका और आखिरकार उसने हत्या की साजिश रचने की बात स्वीकार कर ली।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसका बेबी देवी के साथ लंबे समय से व्यावसायिक संबंध था। दोनों के बीच पैसों और अन्य बातों को लेकर विवाद चल रहा था, जो समय के साथ गहराता गया। इसी विवाद से छुटकारा पाने के लिए उसने हत्या की साजिश रची।
40 हजार की सुपारी, रची गई पूरी योजना
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी गुड्डू वर्णवाल ने शौकत रजा उर्फ गुड्डू अंसारी और जलेश्वर महतो को 40 हजार रुपये देकर बेबी देवी की हत्या की सुपारी दी। इस पूरी डील को तय कराने में विवेक कुमार नामक युवक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
योजना के तहत आरोपियों ने पहले महिला को भरोसे में लिया और उसे मिलने के बहाने बुलाया। इसके बाद उसे एक स्विफ्ट कार में बैठाया गया। रास्ते में ही उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे प्लास्टिक बोरे में बंद किया गया और जमुनिया नदी में फेंक दिया गया, ताकि पहचान मिटाई जा सके और मामला दुर्घटना या अज्ञात मौत की तरह लगे।
तकनीकी साक्ष्य बने केस की कुंजी
एसआईटी टीम ने इस मामले को सुलझाने में आधुनिक तकनीकी संसाधनों का व्यापक उपयोग किया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और गुप्तचरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
पुलिस ने जब संदिग्धों के मोबाइल डेटा का विश्लेषण किया, तो कई महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनसे हत्या की साजिश का पूरा नेटवर्क सामने आ गया। इसके बाद एक-एक कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका
इस मामले में पुलिस ने कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है:
गुड्डू वर्णवाल उर्फ मुकेश कुमार (42 वर्ष) – मुख्य साजिशकर्ता, जिसने हत्या की सुपारी दी।
शौकत रजा उर्फ गुड्डू अंसारी (24 वर्ष) – सुपारी किलर, जिसने हत्या को अंजाम दिया।
जलेश्वर महतो (23 वर्ष) – सह-आरोपी, हत्या में सहयोगी।
विवेक कुमार (30 वर्ष) – बिचौलिया, जिसने सुपारी दिलाने में भूमिका निभाई।
अनिल कुमार (41 वर्ष) – साजिश में सहयोगी।
बरामदगी: हत्या के अहम सबूत
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कई अहम सबूत बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
घटना में प्रयुक्त स्विफ्ट कार (रजिस्ट्रेशन नंबर JH09BG-6008)
कार के अंदर से मिले लंबे बाल और खून के निशान
कुल 6 मोबाइल फोन, जिनका उपयोग साजिश रचने में किया गया
इन सभी साक्ष्यों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, जिससे केस को और मजबूत बनाया जा सके।
पुलिस टीम की सक्रियता
इस पूरे मामले के खुलासे में कई पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एसआईटी टीम में शामिल अधिकारियों ने दिन-रात मेहनत कर इस जघन्य अपराध का पर्दाफाश किया।
एसडीपीओ बशिष्ठ नारायण सिंह ने बताया कि टीम ने समन्वित तरीके से काम करते हुए कम समय में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जो पुलिस की दक्षता और तत्परता को दर्शाता है।
इलाके में दहशत, लोगों में आक्रोश
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। एक महिला की इस तरह सुनियोजित हत्या और शव को बोरे में बंद कर नदी में फेंकने की घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय लोग आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई जारी
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच कर रही है।
निष्कर्ष
जमुनिया नदी में मिले महिला के शव का मामला न केवल एक जघन्य अपराध का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे व्यक्तिगत विवाद और लालच इंसान को अपराध की ओर धकेल देते हैं। हालांकि, पुलिस की तत्परता और तकनीकी दक्षता के चलते इस मामले का शीघ्र खुलासा संभव हो सका।
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि रिश्तों में बढ़ते तनाव और आर्थिक विवाद किस हद तक खतरनाक रूप ले सकते हैं। साथ ही, यह पुलिस की कार्यकुशलता का भी उदाहरण है, जिसने सीमित समय में एक जटिल मामले को सुलझाकर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया।














