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गोमिया में IEPL Orica प्रबंधन बनाम ग्रामीणों का विवाद गहराया, …अब मो. गौहर ने कंपनी प्रबंधन पर दर्ज कराया काउंटर केस, केस में फंसाने, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी का आरोप

गोमिया: गोमिया प्रखंड के आईईएल थाना क्षेत्र अंतर्गत कसवागढ़ गांव में पेयजल आपूर्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर कानूनी टकराव का रूप लेता जा रहा है। 23 अप्रैल को ग्रामीणों द्वारा इंडियन एक्सप्लोसिव्स प्राइवेट लिमिटेड (IEPL) Orica कंपनी के खिलाफ किए गए प्रदर्शन के बाद कंपनी प्रबंधन की ओर से जहां पहले मो. गौहर, चंकी बहादुर, विक्की रविदास सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, वहीं अब उसी मामले में प्रतिक्रिया स्वरूप कसवागढ़ निवासी मो. गौहर ने भी कंपनी के पदाधिकारियों और सुरक्षाकर्मी पर मारपीट, गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए काउंटर केस दर्ज कराया है।

FIR
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इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है, बल्कि यह मामला अब प्रशासन और पुलिस के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह विवाद केवल पानी की समस्या को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन अब यह कानूनी लड़ाई में बदल गया है।

पानी की समस्या बनी विवाद की जड़

कसवागढ़ गांव के ग्रामीण पिछले कुछ समय से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, IEPL Orica कंपनी द्वारा पिछले कई वर्षों से इलाके में पानी की आपूर्ति की जा रही थी, जिससे लोगों को काफी राहत मिलती थी। लेकिन बीते करीब चार महीनों से यह आपूर्ति ठप हो गई है। इसके कारण गांव के लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार कंपनी प्रबंधन को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसके बाद मजबूर होकर 23 अप्रैल को ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

23 अप्रैल का प्रदर्शन और 25 अप्रैल को पहला केस

23 अप्रैल को कसवागढ़ के ग्रामीणों ने कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने पानी की मांग को लेकर आवाज उठाई और कंपनी प्रबंधन से समाधान की अपेक्षा की। लेकिन इसी दौरान स्थिति बिगड़ गई और कंपनी की ओर से आरोप लगाया गया कि मो. गौहर, चंकी बहादुर, विक्की रविदास सहित कुछ ग्रामीणों ने कंपनी के एक विदेशी कर्मचारी को रोककर उसके साथ दुर्व्यवहार किया और हमला किया।

इस आरोप के आधार पर कंपनी प्रबंधन ने 25 अप्रैल को मो. गौहर, चंकी बहादुर, विक्की रविदास सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कराया। इसमें गैरकानूनी जमावड़ा, हमला, आपराधिक बल प्रयोग और विदेशी नागरिक को गलत तरीके से रोकने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।

अब मो. गौहर का काउंटर केस

कंपनी की ओर से दर्ज कराए गए मामले के बाद अब मो. गौहर ने भी कंपनी के अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ काउंटर केस दर्ज कराया है। उन्होंने अपने आवेदन में कंपनी के सुरक्षा प्रबंधक पंकज कुमार, अरविंदम दास, मुकेश कुमार झा, रागिब साबरी और सुरक्षा गार्ड छोटू यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

मो. गौहर के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कंपनी के अधिकारियों ने पहले उनसे और अन्य ग्रामीणों से गाली-गलौच की। इसके बाद उन्हें धमकी दी गई कि उन्हें ऐसे केस में फंसा दिया जाएगा कि वे सालों तक जेल में सड़ते रहेंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के अधिकारियों ने यह भी कहा कि थाना पुलिस पर उनका प्रभाव है और ग्रामीण उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। इस तरह की धमकियों से ग्रामीणों में डर और आक्रोश दोनों पैदा हुआ।

25 अप्रैल की घटना: मारपीट और धमकी का आरोप

मो. गौहर ने पुलिस को बताया कि 25 अप्रैल की शाम के समय जब वह अपने घर लौट रहे थे, तभी कसवागढ़ तालाब के पास कंपनी के सुरक्षा प्रबंधक पंकज कुमार और सुरक्षा गार्ड छोटू यादव ने उन्हें रोक लिया।

उनके अनुसार, दोनों ने उनकी मोटरसाइकिल को जबरन रोककर उनके साथ गाली-गलौच शुरू कर दी। इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। मो. गौहर का कहना है कि उन्हें मारकर तालाब में फेंक देने की भी धमकी दी गई।

क्षेत्र में बढ़ा तनाव

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कसवागढ़ गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। एक तरफ जहां ग्रामीण पानी की समस्या को लेकर परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर लगातार हो रहे केस और काउंटर केस से माहौल गर्म है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे केवल अपने बुनियादी अधिकार – पानी – की मांग कर रहे थे, लेकिन इसके बदले उन्हें कानूनी कार्रवाई और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

पुलिस की जांच

दोनों पक्षों की ओर से मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस के सामने चुनौती यह है कि वह दोनों पक्षों के आरोपों की सत्यता की जांच करे और क्षेत्र में शांति बनाए रखे। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पानी जैसी बुनियादी समस्या का समाधान भी जल्द निकले।

निष्कर्ष

कसवागढ़ का यह मामला केवल एक गांव या एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन समस्याओं को उजागर करता है जो अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण उत्पन्न होती हैं। पानी जैसी आवश्यक सुविधा के अभाव में लोगों को विरोध का रास्ता अपनाना पड़ता है, और कई बार यह विरोध विवाद और कानूनी लड़ाई में बदल जाता है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन और पुलिस इस मामले को किस तरह संभालते हैं। फिलहाल गांव में तनाव बना हुआ है और संबंधित दोनों पक्ष अपने-अपने आरोपों पर अड़े हुए हैं।

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