गोमिया: राजस्थान के कोटा में विहाररत आर्यिका माताजी के साथ हुए सड़क हादसे को लेकर सोमवार को गोमिया अनुमंडल क्षेत्र में जैन समाज का आक्रोश खुलकर सामने आया। सकल दिगंबर जैन समाज गोमिया, साड़म, पेटरवार, ललपनिया एवं जैनामोड़ के लोगों ने संयुक्त रूप से मौन प्रदर्शन कर संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून बनाने और मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई।
समाज के महिला, पुरुष एवं युवा सदस्य हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण ढंग से सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। मौन जुलूस के माध्यम से समाज ने संतों की सुरक्षा को राष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।

प्रधानमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने बेरमो अनुमंडल पदाधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में संजय जैन, मनोज जैन, शैलेश जैन, विकास जैन, पंकज जैन, रूचि जैन समेत कई लोग शामिल थे। ज्ञापन में संत समाज की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाने, विहार मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।
समाज के लोगों ने कहा कि जैन संत और आर्यिकाएं पूर्णतः अहिंसक एवं निहत्थे होते हैं। वे पैदल विहार करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की बनती है।
वीडियो और तथ्यों से उठ रहे कई गंभीर सवाल
संजय जैन ने कहा कि 22 मई को विहाररत आर्यिकाओं के साथ हुई घटना सामान्य सड़क दुर्घटना प्रतीत नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि घटना से जुड़े वीडियो फुटेज और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए SIT अथवा न्यायिक जांच आवश्यक है। साथ ही घटना से जुड़े सभी CCTV फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और तकनीकी प्रमाणों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई।
“संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की उठी मांग
ज्ञापन में जैन समाज ने “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई। समाज का कहना है कि विहार मार्गों पर ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक, पुलिस समन्वय एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इसके अलावा भारत सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाने की भी मांग की गई। समाज का कहना है कि देशभर में विहाररत संतों के लिए सुरक्षा SOP और विशेष दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं, जिससे उनकी यात्रा सुरक्षित रह सके।
असली ड्राइवर को बचाने का लगाया आरोप
प्रदर्शन के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद वास्तविक चालक फरार हो गया, जबकि किसी अन्य व्यक्ति को चालक बताकर गिरफ्तार किया गया है। जैन समाज ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग दोहराते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी स्थिति में बचाया नहीं जाना चाहिए।
“तनाव नहीं, सुरक्षा हमारी प्राथमिकता”
जैन समाज के लोगों ने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का सामाजिक तनाव पैदा करना नहीं है। समाज केवल इतना चाहता है कि भविष्य में संतों के साथ ऐसी दुखद घटनाएं न हों और उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर कदम उठाए।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।














