लाभुक उषा देवी ने बिना जानकारी भुगतान का लगाया आरोप, रोजगार सेवक ने स्थल परिवर्तन की बात स्वीकारी; मुखिया ने कहा- लाभुक को थी पूरी जानकारी
गोमिया। गोमिया प्रखंड अंतर्गत महुआटांड़ पंचायत में मनरेगा योजना के तहत स्वीकृत डोभा निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महुआटांड़ गांव की लाभुक उषा देवी ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी जमीन पर स्वीकृत डोभा का निर्माण धरातल पर हुआ ही नहीं, लेकिन सरकारी अभिलेखों में योजना को पूरा दिखाते हुए मजदूरी मद में राशि का भुगतान कर दिया गया। लाभुक का कहना है कि उसे इस भुगतान और योजना से संबंधित कई गतिविधियों की जानकारी तक नहीं थी।

लाभुक द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, महुआटांड़ पंचायत के महुआटांड़ गांव में उनकी जमीन पर मनरेगा के तहत “डोभा निर्माण” योजना स्वीकृत की गई थी। योजना का वर्क कोड 3420005023/IF/7080903956473 बताया गया है। योजना का नाम महुआटांड़ गांव के उषा देवी, पति पवन कुमार महतो की जमीन में डोभा निर्माण दर्ज है। शिकायत में योजना की प्राक्कलित राशि 3.79,885 लाख रुपये बताई गई है।
लाभुक का आरोप- जमीन पर डोभा बना ही नहीं
उषा देवी ने बीडीओ को दिए आवेदन में कहा है कि संबंधित योजना के एसेट रजिस्टर और मास्टर रोल में कार्य पूर्ण होने तथा मजदूरी भुगतान का रिकॉर्ड दर्ज है। बैंक खातों में मजदूरी की राशि जमा होने का भी उल्लेख दस्तावेजों में किया गया है। लेकिन जब स्थल की वास्तविक स्थिति देखी जाती है तो उनकी जमीन पर डोभा निर्माण दिखाई नहीं देता।
लाभुक ने आरोप लगाया है कि उनकी जानकारी के बिना मास्टर रोल के माध्यम से भुगतान किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि योजना से जुड़े लोगों द्वारा 1 लाख 59 हजार 894 रुपये की राशि की निकासी कर ली गई है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि इसी प्रकार की स्थिति महुआटांड़ पंचायत के अन्य लाभुकों के साथ भी हुई है।
लाभुक ने पूरे मामले की तत्काल जांच, स्थल निरीक्षण तथा योजना से जुड़े अभिलेखों और भुगतान की जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने दोषी पाए जाने वाले अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है।
रोजगार सेवक बोले- डोभा बना है, लेकिन स्थल परिवर्तन हुआ
मामले में महुआटांड़ पंचायत के रोजगार सेवक एकराम शमशी ने डोभा निर्माण होने की बात कही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि डोभा का स्थल परिवर्तन हुआ है। रोजगार सेवक के अनुसार, लाभुक और मुखिया की सहमति से डोभा का निर्माण स्वीकृत स्थल के बजाय दूसरे स्थान पर किया गया है।
रोजगार सेवक के इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है, क्योंकि यदि योजना के स्वीकृत स्थल में परिवर्तन किया गया है तो इसकी वैधानिक प्रक्रिया और सक्षम स्तर से अनुमति ली गई थी या नहीं, यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है। योजना स्थल परिवर्तन से संबंधित दस्तावेज और विभागीय अनुमति की भी जांच आवश्यक मानी जा रही है।
मुखिया और पति ने कहा- लाभुक को पूरी जानकारी थी
इधर महुआटांड़ पंचायत की मुखिया बुधनी देवी और उनके पति फूलचंद केवट ने लाभुक द्वारा लगाए गए आरोपों से अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि लाभुक को योजना से संबंधित सभी बातों की जानकारी थी। उन्होंने दावा किया कि लाभुक की सहमति से ही संबंधित कार्य और स्थल को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ी थी।
मुखिया और उनके पति का कहना है कि अब लाभुक अपनी पूर्व की बात से पलट गई हैं और इसी कारण शिकायत की गई है। हालांकि, लाभुक की सहमति और स्थल परिवर्तन से संबंधित दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पंचायत सेवक का जवाब- पहले जांच होगी, फिर कार्रवाई
पूरे मामले में पंचायत सेवक विवेक कुमार का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे एसआईआर के कार्य में व्यस्त हैं। उन्होंने मामले की जांच करने की बात कही है। पंचायत सेवक के अनुसार, मामले की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे में अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पर नजरें टिकी हैं। जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि योजना का वास्तविक निर्माण कहां हुआ, स्वीकृत स्थल और निर्मित स्थल में अंतर क्यों आया, स्थल परिवर्तन के लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई थी या नहीं, मास्टर रोल में दर्ज मजदूरों ने वास्तव में काम किया था या नहीं और भुगतान की गई राशि का वास्तविक लाभ किसे मिला।
अभिलेख और धरातल की जांच से खुलेगा मामला
मनरेगा योजनाओं में कार्य की स्वीकृति से लेकर स्थल चयन, मस्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति, मजदूरी भुगतान और परिसंपत्ति के निर्माण तक पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जाता है। ऐसे में इस मामले में मस्टर रोल, एफटीओ/भुगतान विवरण, एसेट रजिस्टर, योजना की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, स्थल की तस्वीरें तथा जियो-टैगिंग रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं और बिना कार्य कराए सरकारी राशि का भुगतान किया गया है, तो यह सरकारी राशि के दुरुपयोग का गंभीर मामला बन सकता है। वहीं यदि स्थल परिवर्तन की बात सही है, तो उसके लिए अपनाई गई प्रक्रिया और सक्षम स्तर की अनुमति की जांच भी जरूरी होगी।
फिलहाल लाभुक की शिकायत और पंचायत कर्मियों के अलग-अलग बयानों के बाद महुआटांड़ पंचायत में मनरेगा योजना की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रखंड प्रशासन इस मामले में स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच कब कराता है तथा जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है।















