गोमिया। गोमिया प्रखंड के सियारी पंचायत अंतर्गत छोटकी कोयोटांड निवासी 43 वर्षीय प्रवासी मजदूर नंदलाल महतो की गुजरात के जामनगर जिले में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही गांव में मातम पसर गया, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक के परिजनों ने दुर्घटना की परिस्थितियों की पूरी जांच कराने की मांग की है। वहीं, मृतक की पत्नी शांति देवी ने अपने पति के साथ किसी अनहोनी की आशंका भी जताई है।

परिजनों के अनुसार नंदलाल महतो करीब तीन माह पूर्व घर की आर्थिक स्थिति सुधारने और अपनी तीन बेटियों की बेहतर पढ़ाई-लिखाई के उद्देश्य से गुजरात गए थे। वहां वह सरिया-सेटरिंग का काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। परिवार के मुताबिक, दो दिन पूर्व ही नंदलाल महतो की फोन पर पत्नी से बातचीत हुई थी। बातचीत के दौरान उन्होंने जल्द ही घर लौटने की बात कही थी।
बताया गया कि घर लौटने की तैयारी के सिलसिले में नंदलाल ने अपनी पत्नी से फोन-पे के माध्यम से दो हजार रुपये भेजने को कहा था। पत्नी ने उनकी मांग के अनुसार दो हजार रुपये उनके खाते में भेज भी दिए थे। इसके बाद अचानक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत की खबर परिवार तक पहुंची, जिससे पत्नी और अन्य परिजन सदमे में हैं।

दो दिन पहले हुई थी पत्नी से बातचीत
मृतक की पत्नी शांति देवी ने बताया कि पति से दो दिन पहले ही फोन पर बातचीत हुई थी। उस समय वह पूरी तरह सामान्य थे और घर लौटने की बात कर रहे थे। उन्होंने घर आने के लिए दो हजार रुपये भी मंगवाए थे, जिसे उन्होंने भेज दिया था। ऐसे में अचानक उनकी सड़क दुर्घटना में मौत की सूचना मिलने से परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है।
शांति देवी ने दुर्घटना की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह सड़क दुर्घटना है तो इसकी पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए कि हादसा किस परिस्थिति में हुआ और किस वाहन की टक्कर से उनके पति की मौत हुई।
पेट्रोल पंप के पास अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर
पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जामनगर जिले के मोतीखावड़ी हाईवे रोड स्थित एक पेट्रोल पंप के पास नंदलाल महतो को किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद पुलिस ने मामले की जानकारी जुटाने की कार्रवाई शुरू की है।
अज्ञात वाहन की पहचान और दुर्घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर भी जांच की जा रही है। परिजनों की मांग है कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर घटना से जुड़ी परिस्थितियों को स्पष्ट करे।
तीन बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
नंदलाल महतो अपने पीछे पत्नी शांति देवी, पिता गंगो महतो, माता आशा देवी और तीन बेटियों को छोड़ गए हैं। उनकी तीन बेटियां आरती कुमारी, काजल कुमारी और राधा कुमारी हैं। परिवार के लिए नंदलाल ही आर्थिक सहारा थे। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट भी गहरा गया है।
पिता गंगो महतो और माता आशा देवी सहित परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस व्यक्ति से परिवार को बेटियों की पढ़ाई और भविष्य बेहतर बनाने की उम्मीद थी, उसकी अचानक मौत ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।
शव को गांव लाने की मांग
घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों में भी शोक की लहर है। पंचायत के मुखिया रामबृक्ष मुर्मू और गांव के समाजसेवी संतोष महतो ने नंदलाल महतो की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुखिया रामबृक्ष मुर्मू ने स्थानीय प्रशासन से मृतक का शव गुजरात से उसके पैतृक गांव छोटकी कोयोटांड तक लाने में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की है।
संतोष महतो ने कहा कि नंदलाल महतो परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बच्चों के भविष्य के लिए रोजगार की तलाश में गुजरात गए थे। ऐसे में उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने प्रशासन से पीड़ित परिवार को हरसंभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की।
प्रवासी मजदूरों की लगातार हो रही मौतों से बढ़ी चिंता
गोमिया प्रखंड से बड़ी संख्या में मजदूर रोजगार की तलाश में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु सहित देश के विभिन्न हिस्सों में जाते हैं। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं मिलने के कारण कई परिवारों के युवा और अधेड़ सदस्य दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने को मजबूर होते हैं।
बीते एक सप्ताह के दौरान गोमिया प्रखंड के कई प्रवासी मजदूरों की दूसरे राज्यों में हादसों में मौत की खबरें सामने आने से क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
प्रवासी मजदूरों के परिजनों का कहना है कि परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए घर से दूर जाने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर ठोस व्यवस्था जरूरी है। वहीं, किसी हादसे में मजदूर की मौत होने पर उसके शव को घर तक पहुंचाने, परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और घटना की निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया को भी सरल और तेज किए जाने की आवश्यकता है।
नंदलाल महतो की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले मजदूरों और उनके परिवारों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। फिलहाल परिजन अपने प्रियजन के शव के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।
















