गोमिया। स्नेक बाइट (सर्पदंश) के सफल इलाज के लिए गोमिया सहित आसपास के क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना चुका आर्डियर अस्पताल पिछले करीब एक सप्ताह से झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) द्वारा संचालन की अनुमति CTO (Consent to Operate) रद्द किए जाने के कारण बंद है। अस्पताल प्रबंधन को अगले आदेश तक अस्पताल का संचालन बंद रखने का निर्देश मिलने के बाद यहां आने वाले बाह्य मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों और उनके परिजनों को हो रही है, जो सर्पदंश की स्थिति में तत्काल उपचार की उम्मीद लेकर आर्डियर अस्पताल पहुंचते थे।

बताया जाता है कि आर्डियर अस्पताल में गोमिया के अलावा बेरमो, फुसरो, नेरकी, विष्णुगढ़, रामगढ़, रजरप्पा सहित इसके —आसपास के कई दूरदराज क्षेत्रों से भी सर्पदंश के मरीज उपचार के लिए पहुंचते रहे हैं। अस्पताल के बंद होने के बाद ऐसे मरीजों को यहां उपचार नहीं मिल पा रहा है और उन्हें दूसरे अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। सर्पदंश के मामलों में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में अस्पताल बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है।
कागजात पूरे करने के बावजूद CTO लंबित
आर्डियर अस्पताल के सीएमओ डॉ. प्रशांत शेखर पात्रा ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन वर्ष 2024 से ही CTO प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में लगा हुआ है। उनके अनुसार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मांगे गए सभी आवश्यक कागजात और दस्तावेज उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। इसके बावजूद CTO की प्रक्रिया अब तक लंबित रही और इसी बीच प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा CTO को रद्द कर अस्पताल का संचालन बंद करने का आदेश दिया गया।

डॉ. पात्रा ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद CTO रद्द किया जाना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि अस्पताल केवल गोमिया क्षेत्र के मरीजों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि आसपास के कई जिलों और प्रखंडों से लोग यहां इलाज के लिए आते थे। विशेषकर सर्पदंश के मरीजों के लिए अस्पताल एक महत्वपूर्ण उपचार केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल बंद होने के बाद रोजाना अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। सामान्य बीमारी से संबंधित मरीजों के साथ-साथ सर्पदंश के मरीजों को भी तत्काल दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
स्नेक बाइट के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण रहा है अस्पताल
गोमिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेत, जंगल, झाड़ियों और कच्चे मकानों के आसपास सांप निकलने की घटनाएं आम हैं। ऐसे में सर्पदंश के बाद पीड़ितों को तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है। आर्डियर अस्पताल में लंबे समय से सर्पदंश के मरीज उपचार के लिए पहुंचते रहे हैं।
अस्पताल के अचानक बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के सामने समय पर उपचार उपलब्ध कराने की चुनौती खड़ी हो गई है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में अस्पताल की दूरी और उपचार में होने वाली देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

फैक्ट्री एक्ट के तहत कर्मियों को मिल रही फर्स्ट एड सुविधा
इधर ओरिका गोमिया के एचआर हेड रोशन सिन्हा ने बताया कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अस्पताल प्रबंधन से मांगे गए सभी जरूरी कागजात उपलब्ध करा दिए गए थे। इसके बावजूद बोर्ड द्वारा CTO को रिजेक्ट कर दिया गया। इसी वजह से आर्डियर अस्पताल ट्रस्ट यूनिट को बंद करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल फैक्ट्री एक्ट के तहत भी आता है, इसलिए कंपनी में कार्यरत कर्मियों के लिए फिलहाल आवश्यक फर्स्ट एड सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि सरकार एवं संबंधित विभाग के आदेश के कारण फिलहाल अस्पताल में किसी भी बाहरी मरीज को भर्ती नहीं किया जा रहा है और नियमित चिकित्सा सेवाएं बंद हैं।
रोशन सिन्हा ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जो भी आवश्यक कागजात या दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, उन्हें उपलब्ध कराया जा रहा है। कंपनी और अस्पताल प्रबंधन का प्रयास है कि सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी हों और अस्पताल को दोबारा चालू करने की अनुमति मिल सके।

जल्द सेवा बहाल होने की उम्मीद
अस्पताल प्रबंधन की ओर से लगातार संबंधित विभाग के साथ संपर्क कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने की बात कही जा रही है। प्रबंधन को उम्मीद है कि आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद CTO से संबंधित समस्या का समाधान होगा और अस्पताल में दोबारा स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की जा सकेंगी।
फिलहाल अस्पताल बंद रहने से गोमिया सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। खासकर सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में इलाज के लिए आर्डियर अस्पताल पर निर्भर रहने वाले मरीजों के सामने वैकल्पिक व्यवस्था की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से मामले का जल्द समाधान कर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बहाल कराने की मांग की है।














