गोमिया। गोमिया प्रखंड के लोधी पंचायत अंतर्गत बनचतरा गांव के पीडीएस डीलर अर्जुन करमाली (बद्री करमाली) पर राशन कार्डधारकों ने बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंट लेने के बावजूद खाद्यान्न उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया है। सोमवार को बड़ी संख्या में राशन कार्डधारक गोमिया प्रखंड कार्यालय पहुंचे और प्रखंड विकास पदाधिकारी महादेव महतो से मामले की शिकायत करते हुए जांच एवं बकाया राशन दिलाने की मांग की।

राशन कार्डधारकों का आरोप है कि पीडीएस डीलर द्वारा प्रत्येक माह राशन वितरण के नाम पर उनका बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंट ले लिया जाता है, लेकिन खाद्यान्न मांगने पर अगले माह राशन देने की बात कहकर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। कार्डधारकों के अनुसार, लंबे समय से ऐसी स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण कई लाभुकों का दो माह तो कुछ कार्डधारकों का तीन माह तक का खाद्यान्न उठाव बकाया बताया जा रहा है।
लाभुकों ने बताया कि राशन मिलने की उम्मीद में वे हर माह डीलर के पास पहुंचते हैं, लेकिन बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उन्हें खाद्यान्न नहीं दिया जाता। उनका कहना है कि गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकार की ओर से मिलने वाला अनाज काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में समय पर राशन नहीं मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सोमवार को कार्डधारकों ने प्रखंड कार्यालय पहुंचकर बीडीओ महादेव महतो के समक्ष अपनी समस्या रखी और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। लाभुकों ने यह भी आग्रह किया कि जिन कार्डधारकों का राशन बकाया है, उन्हें उनका पूरा खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए तथा यदि शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित डीलर के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इधर, गोमिया बीडीओ महादेव महतो ने राशन कार्डधारकों को आश्वस्त किया कि मामले की जांच कराई जाएगी और उनके साथ न्याय होगा। उन्होंने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की वास्तविकता की जांच करने की बात कही। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लाभुकों को बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद खाद्यान्न क्यों नहीं मिला और वास्तव में कितने कार्डधारकों का राशन बकाया है।
वहीं, पीडीएस डीलर बद्री करमाली ने राशन कार्डधारकों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उनके स्तर से किसी भी कार्डधारक का राशन उठाव बकाया नहीं है और सभी लाभुकों को नियमानुसार खाद्यान्न दिया जा रहा है। डीलर ने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
अब पूरे मामले में प्रखंड प्रशासन की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। राशन कार्डधारकों की शिकायत और डीलर के पक्ष के बीच प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।














