गोमिया। गोमिया प्रखंड के पचमो पंचायत अंतर्गत झुमरा पहाड़ क्षेत्र में भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए 70 वर्षीय बद्री महतो का इलाज उच्च चिकित्सा संस्थान में जारी है। वन विभाग और जिला प्रशासन पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। इस संबंध में डीएफओ बोकारो संदीप शिंदे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि घायल के उपचार और राहत संबंधी सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि 6 जून को झुमरा पहाड़ निवासी बद्री महतो अपनी गाय के बच्चा देने की सूचना मिलने पर घर से लगभग एक किलोमीटर दूर जंगल की ओर गए थे। इसी दौरान जंगल के समीप स्थित एक नाले में पानी पीने पहुंचे भालू से उनका सामना हो गया। अचानक हुए आमने-सामने के बाद भालू ने उन पर हमला कर दिया। हमले में उनके छाती, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। घायल बुजुर्ग के शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह उन्हें भालू के चंगुल से बचाया।
ग्रामीणों की तत्परता से बची जान
घटना की सूचना मिलते ही उनके पुत्र प्रयाग महतो एवं ग्रामीणों ने घायल को तत्काल गोमिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार किया गया। स्थिति गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल चास रेफर कर दिया। वहां चिकित्सकीय जांच के बाद उनकी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें रिम्स रांची भेज दिया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा है।
वन विभाग लगातार परिवार के संपर्क में
डीएफओ संदीप शिंदे ने बताया कि वन विभाग की टीम घटना के बाद से ही सक्रिय है। विभागीय कर्मचारी लगातार घायल के परिवार के संपर्क में हैं और उपचार से संबंधित सभी गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि घायल के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा तथा विभागीय नियमों के तहत मिलने वाली सहायता राशि की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों को सक्रिय कर दिया गया था और स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों को किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना देने के लिए विभागीय कर्मचारियों के संपर्क नंबर भी उपलब्ध करा दिए गए हैं।
त्वरित प्रतिक्रिया टीम को रखा गया अलर्ट
वन विभाग ने क्षेत्र में अपनी त्वरित प्रतिक्रिया टीम (क्यूआरटी) को पूरी तरह अलर्ट मोड में रखा है। किसी भी अप्रिय स्थिति या जंगली जानवर की गतिविधि की सूचना मिलने पर टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करेगी। विभाग लगातार क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
फिलहाल भालू को पकड़ने का नहीं चलेगा अभियान
डीएफओ ने प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है कि भालू सामान्यतः हमले के बाद घने जंगलों में वापस लौट जाते हैं। अब तक ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है कि संबंधित भालू असामान्य व्यवहार कर रहा हो या रेबीज (पागलपन) से संक्रमित हो। ऐसे में फिलहाल उसे पकड़ने के लिए कोई विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता नहीं समझी गई है।
हालांकि उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भालू की गतिविधियों से लोगों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होता है या किसी अन्य प्रकार की स्थिति सामने आती है तो वन विभाग उसे पकड़ने अथवा आवश्यक कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
ग्रामीणों को जंगल से दूर रहने की सलाह
सुरक्षा के मद्देनजर वन विभाग ने झुमरा पहाड़ एवं आसपास के गांवों के लोगों को अगले कुछ दिनों तक जंगल की ओर नहीं जाने की सलाह दी है। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय सतर्कता बरतने तथा बच्चों और मवेशियों को अकेले जंगल क्षेत्र में नहीं भेजने की अपील की गई है।
बढ़ रही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं
झुमरा पहाड़ का इलाका घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों से घिरा हुआ है। गर्मी के मौसम में पानी और भोजन की तलाश में जंगली जानवर अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों के निकट पहुंच जाते हैं। वन विभाग के अनुसार ऐसे समय में मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की आशंका बढ़ जाती है। बद्री महतो पर हुआ हमला भी इसी प्रकार की घटना माना जा रहा है।
फिलहाल पूरा प्रशासनिक तंत्र घायल बुजुर्ग के उपचार और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है। ग्रामीणों ने भी वन विभाग से जंगल से सटे गांवों में नियमित गश्ती, जागरूकता अभियान तथा अतिरिक्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं क्षेत्र के लोग बद्री महतो के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
















