गोमिया (बोकारो): गोमिया प्रखंड के चतरोचट्टी थाना क्षेत्र अंतर्गत कतवारी गांव के प्रवासी मजदूर सत्येन्द्र महतो का शव सड़क दुर्घटना में मौत के लगभग एक माह बाद बुधवार को सऊदी अरब से उनके पैतृक गांव पहुंचा। शव के गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के आंसूओं और पत्नी-बच्चों की चीख-पुकार से माहौल बेहद गमगीन हो गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि एवं शुभचिंतक उनके घर पहुंचे और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

घर के आंगन में जैसे ही एंबुलेंस से शव उतारा गया, पत्नी बसंती देवी अपने पति के शव से लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगीं। पुत्री प्रीति कुमारी, पुत्र अरविंद कुमार और मंगेश कुमार सहित अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। यह हृदय विदारक दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
मृतक के भाई नकुल महतो ने बताया कि सत्येन्द्र महतो रोजी-रोटी की तलाश में सऊदी अरब गए थे, जहां वे एक निजी कंपनी में ट्रक चालक के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि 25 जून 2026 को सऊदी अरब में सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। घटना की सूचना मिलने के बाद से पूरा परिवार उनके पार्थिव शरीर के भारत लाए जाने की प्रतीक्षा कर रहा था। विभिन्न सरकारी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण लगभग एक माह बाद उनका शव भारत लाया जा सका।
पत्नी बसंती देवी ने बताया कि सत्येन्द्र महतो 26 नवंबर 2024 को परिवार के बेहतर भविष्य और आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद लेकर सऊदी अरब गए थे। उन्होंने सोचा था कि विदेश में मेहनत कर अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार का जीवन बेहतर बनाएंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आज उनका सपना अधूरा रह गया और पूरा परिवार असहनीय पीड़ा में डूब गया है।

शव के गांव पहुंचने पर चतरोचट्टी पंचायत के मुखिया महादेव महतो ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने सत्येन्द्र महतो के निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि परिवार इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि डुमरी विधायक जयराम महतो के प्रयासों से ही पश्चिम बंगाल से शव को उनके पैतृक गांव तक लाया जा सका। उन्होंने सरकार से मृतक के आश्रित परिवार को आर्थिक सहायता, बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था तथा परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी की।
मौके पर पहुंचे प्रवासी मजदूरों के हित में कार्य करने वाले सिकन्दर अली ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर पहल की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई प्रवासी मजदूरों की विदेशों में दुर्घटना अथवा अन्य कारणों से मौत होने के बाद उनके शव कई-कई महीनों तक भारत नहीं पहुंच सके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित परिवारों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की कि विदेशों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए तथा किसी भी दुर्घटना की स्थिति में उनके शव को शीघ्र स्वदेश लाने के लिए एक त्वरित एवं सरल प्रणाली विकसित की जाए, ताकि परिजनों को लंबे समय तक इंतजार और परेशानियों का सामना न करना पड़े।
बुधवार को कतवारी गांव में दिनभर शोक का माहौल बना रहा। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग दिवंगत सत्येन्द्र महतो के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। हर किसी की जुबान पर यही चर्चा थी कि परिवार की खुशहाली के लिए विदेश गया एक मेहनतकश मजदूर आखिरकार तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटा। इस मार्मिक घटना ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, विदेशों में उनके कार्यस्थलों की परिस्थितियों और मृत्यु के बाद शवों को शीघ्र स्वदेश लाने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।














