गोमिया: बोकारो जिले के गोमिया में हुए चर्चित पेंटर मोइनुद्दीन उर्फ गदौरी हत्याकांड का पुलिस ने सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में तेनुघाट जेल भेज दिया है। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को झकझोर दिया था, बल्कि इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल भी पैदा कर दिया था। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और एक सप्ताह के भीतर मामले के खुलासे को महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

घटना का विवरण
मृतक मोइनुद्दीन उर्फ गदौरी (58) मूल रूप से हजारीबाग जिले के पिपचो दारू का निवासी था। वह लंबे समय से गोमिया रेलवे क्रॉसिंग के पास एक किराए के मकान में रहकर वाहनों की पेंटिंग का काम करता था। अपने काम के कारण वह इलाके में जाना-पहचाना चेहरा बन चुका था। 16 अप्रैल 2026 को उसका शव उसके घर के पीछे खून से लथपथ हालत में बरामद किया गया। शव की स्थिति बेहद भयावह थी। उसके सिर और कान पर गंभीर चोटों के निशान थे, जिससे साफ जाहिर हो रहा था कि उस पर बेरहमी से हमला किया गया था। घटनास्थल से खून से सनी लकड़ी भी बरामद की गई, जो हत्या में प्रयुक्त हथियार माना गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। इस हत्या ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए गोमिया थाना पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। मृतक के भतीजे तबारक अंसारी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने तकनीकी और पुलिसबल का उपयोग करते हुए जांच को आगे बढ़ाया। बेरमो एसडीपीओ बीएन सिंह ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह हत्या सुनियोजित साजिश के तहत कराई गई थी, जिसके लिए 25 हजार रुपये की सुपारी दी गई थी।
हत्या के पीछे का कारण
जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे मुख्य कारण व्यवसायिक विवाद था। मुख्य साजिशकर्ता धनराज श्रीवास्तव, जो गर्वमेंट कॉलोनी का निवासी है, अपने पार्टनर के साथ मिलकर मछली-मुर्गा की दुकान चलाता था। मृतक मोइनुद्दीन के पास वाहन पेंटिंग का काम होने के कारण उसके यहां कई वाहन खड़े रहते थे। ये वाहन अक्सर धनराज की दुकान के सामने खड़े हो जाते थे, जिससे उसके व्यवसाय पर असर पड़ता था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। यह विवाद धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि धनराज ने हत्या की साजिश रच डाली।

सुपारी देकर कराई गई हत्या
पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि धनराज श्रीवास्तव ने देवीपुर निवासी अर्जुन कुमार तिवारी उर्फ बाबा को 25 हजार रुपये की सुपारी देकर हत्या करने के लिए तैयार किया। योजना के तहत अर्जुन तिवारी ने मौके का फायदा उठाते हुए मोइनुद्दीन पर लकड़ी के पट्टे से कई बार हमला किया। हमले की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि मोइनुद्दीन की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गया।

गिरफ्तारी और खुलासा
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और गुप्त सूचना के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और पूरी साजिश का खुलासा किया। एसडीपीओ बीएन सिंह ने बताया कि मुख्य साजिशकर्ता धनराज श्रीवास्तव का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ पहले से चोरी, लूट और आर्म्स एक्ट जैसे कई मामले दर्ज हैं।
बरामदगी
पुलिस ने घटना में प्रयुक्त कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
घटना में प्रयुक्त खून से सना लकड़ी का पट्टा
अर्जुन तिवारी के पास से रेडमी कंपनी का हरे रंग का मोबाइल फोन
धनराज श्रीवास्तव के पास से एक स्विफ्ट कार (रजिस्ट्रेशन नंबर JH09AE7448)
इन बरामदगी से पुलिस को मामले को मजबूत बनाने में मदद मिली है।
पुलिस टीम की भूमिका
इस पूरे ऑपरेशन में कई पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। गोमिया थाना प्रभारी प्रफुल्ल महतो के नेतृत्व में टीम ने लगातार प्रयास कर इस जटिल मामले को सुलझाया। अन्य अधिकारियों में आईईएल थाना प्रभारी एसके मंडल, पेटरवार थाना प्रभारी राजू मुंडा, तेनुघाट ओपी प्रभारी भजन लाल महतो, एसआई मनोज कुमार, एसआई अरुण कुमार, एसआई बिरसा बाड़ा और एसआई अखिलेश कुमार शामिल रहे। इसके अलावा तकनीकी शाखा बोकारो का भी विशेष योगदान रहा।
इलाके में दहशत और राहत
हत्या की इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। लोग अपने घरों से निकलने में भी डर महसूस कर रहे थे। लेकिन पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है। स्थानीय लोगों ने पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि अगर समय पर कार्रवाई नहीं होती तो स्थिति और बिगड़ सकती थी।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस का कहना है कि वह इस केस को मजबूत तरीके से अदालत में प्रस्तुत करेगी ताकि आरोपियों को कड़ी सजा मिल सके।
निष्कर्ष
गोमिया का यह हत्याकांड इस बात का उदाहरण है कि छोटे-छोटे विवाद किस तरह बड़े अपराध का रूप ले सकते हैं। महज दुकान के सामने वाहन खड़ा करने को लेकर शुरू हुआ विवाद एक व्यक्ति की जान लेने तक पहुंच गया। इस पूरे मामले में पुलिस की सक्रियता, तकनीकी सहायता और टीमवर्क ने एक बार फिर कानून व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत किया है।












