गोमिया। गोमिया प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय चिदरी में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर फहराए गए राष्ट्रीय ध्वज को निर्धारित समय पर नहीं उतारे जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय परिसर में 15 अगस्त को पूरे सम्मान के साथ फहराया गया तिरंगा अगले दिन 16 अगस्त की शाम करीब 4:30 बजे उतारा गया। इसे लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और वे विद्यालय के प्रधानाध्यापक के विरुद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बताया जाता है कि 15 अगस्त को विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनूप पांडेय ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को पूरे सम्मान और गरिमा के साथ फहराया था। हालांकि, ध्वजारोहण के बाद निर्धारित समय पर ध्वज उतारने की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो सकी। ग्रामीणों के अनुसार, 16 अगस्त की शाम लगभग साढ़े चार बजे तिरंगे को उतारा गया।
मामले को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि तिरंगा देश के सम्मान और गौरव का प्रतीक है। ऐसे में उसे निर्धारित समय पर नहीं उतारा जाना गंभीर लापरवाही है। ग्रामीण इसे प्रधानाध्यापक की नासमझी और लापरवाही बताते हुए संबंधित विभाग से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनूप पांडेय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति को ध्वज उतारने की जिम्मेदारी सौंपी थी और किसी आवश्यक कार्य से विद्यालय से चले गए थे। हालांकि उन्होंने जिम्मेदारी सौंपे गए व्यक्ति का नाम नहीं बताया। प्रधानाध्यापक के अनुसार, जिस व्यक्ति को ध्वज उतारने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसके बेटे का उसी दिन दोपहर में सड़क हादसा हो गया, जिसके बाद वह अस्पताल चला गया। इसी वजह से तिरंगा समय पर नहीं उतारा जा सका।
इधर, घटना के बाद ग्रामीणों के साथ-साथ स्थानीय शिक्षित समाज के एक तबके में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी जिम्मेदारी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए था। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर दोषी की जिम्मेदारी तय करने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
हालांकि, यह भी शर्मनाक है कि समाज या आस-पास के युवा जिसकी नजर पुरे घटनाक्रम पर थी उन्हें भी आकर यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी और ससम्मान तिरंगे को उतारना चाहिए था और उन्होंने ऐसा नहीं किया।

















