
गोमिया। जहां पूरा देश रामनवमी के पावन पर्व पर भक्ति और उल्लास में डूबा था, वहीं गोमिया प्रखंड के बड़की सीधाबारा पंचायत अंतर्गत कसियाडीह गांव में एक बदनसीब परिवार के लिए त्योहार की ये खुशियां उम्र भर के गम में बदल गईं। विदेश में रह रहे भैरव महतो व पेंगिया देवी के इकलौते बेटे मनोज कुमार महतो (43) की अचानक मौत की खबर ने हंसते-खेलते परिवार की दुनिया उजाड़ दी। त्योहार के बीच आया मनहूस फोनमिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार घर में रामनवमी की पूजा और उत्सव की तैयारियों में जुटा था। घर में पकवान बन रहे थे और सगे-संबंधियों का आना-जाना लगा था। इसी बीच शुक्रवार शाम विदेश से आए एक फोन कॉल ने सबको झकझोर कर रख दिया। फोन पर सूचना मिली कि उनके जवान बेटे की मृत्यु हो गई है। खबर सुनते ही घर में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते खुशियों वाला घर मातम के सन्नाटे में तब्दील हो गया।

मौत की वजह अब भी रहस्यपत्नी कौशल्या देवी ने बताया कि बेटे की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका अभी तक कोई स्पष्ट कारण पता नहीं चल सका है। माता-पिता सहित परिजनों का कहना है कि मनोज इसी 8 मार्च को ही अबुधाबी बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में मजदूरी कार्य करने की बात कहकर गया था। उनकी कुछ समय पहले ही बात हुई थी और वह पूरी तरह स्वस्थ था। बड़की सीधाबारा पंचायत के मुखिया रितलाल महतो ने बताया कि अचानक हुई इस अनहोनी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया कि भैरव महतो व पेंगिया देवी के एक पुत्र लुटन महतो की मौत वर्ष 2011 में सड़क दुर्घटना में हो गई थी। तब से मनोज ही घर का इकलौता कमाऊ और जीवन जीने का सहारा था। उन्होंने उसके असामयिक मौत पर गहरा दुःख जताते हुए शोक संतप्त परिवार को ढाढस बंधाया है। शव लाने की गुहारजवान बेटे को खोने के बाद अब बूढ़े माता-पिता और पत्नी की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। परिवार ने सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके बेटे के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द वतन वापस लाने में मदद की जाए, ताकि वे अपने लाडले का अंतिम संस्कार कर सकें। फिलहाल, पूरा गांव और रिश्तेदार पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हैं, लेकिन इस गहरे जख्म की भरपाई मुमकिन नहीं दिखती। मृतक का इकलौता पुत्र धीरज कुमार महतो अभी गुजरात में है जो पिता की मौत की सूचना के बाद घर लौट रहा है।















