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झारखंड की राजनीति के पुरोधा माधव लाल नहीं रहे…, जनसेवा के एक युग का अंत

गोमिया: झारखंड की राजनीति से बुधवार सुबह एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गोमिया के पूर्व विधायक, बिहार और झारखंड सरकार में मंत्री रह चुके वरिष्ठ जननेता माधव लाल सिंह उर्फ “माधो बाबू” का निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही गोमिया, बोकारो समेत पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इसे राज्य की अपूरणीय क्षति बताया है।

Madhav Lal Singh

माधव लाल सिंह उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया। वे लंबे समय तक जनता के बीच सक्रिय रहे और अपनी साफ-सुथरी छवि, सादगीपूर्ण जीवनशैली तथा प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाते थे। आम लोगों के सुख-दुख में शामिल रहना उनकी पहचान थी। यही कारण था कि वे सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि जनता के बीच “माधो बाबू” के नाम से एक भरोसेमंद जननेता के रूप में प्रसिद्ध थे।

गोमिया की राजनीति का मजबूत चेहरा

माधव लाल सिंह गोमिया विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक चुने गए। उन्होंने वर्ष 1985, 1990, 2000 और 2009 में गोमिया विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी। वर्ष 2000 में बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री बने तथा झारखंड गठन के बाद वर्ष 2003 में भी मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। जनता ने उन पर बार-बार भरोसा जताया और उन्होंने भी क्षेत्र के विकास तथा लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर काम किया। उनके कार्यकाल में सड़क, बिजली, पानी और आधारभूत सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण पहल की गईं। यही कारण भी रहा कि इस दौरान उन्हें उत्कृष्ट विधायक के सम्मान से भी नवाजा गया।

वे एकीकृत बिहार सरकार और बाद में झारखंड सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर अपनी मजबूत पकड़ और निर्णय क्षमता का परिचय दिया। अधिकारी वर्ग में भी उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान थी। कहा जाता है कि वे फाइलों और योजनाओं की गहरी जानकारी अपने दिल-दिमाग रखते थे तथा हर निर्णय में जनहित को सर्वोपरि मानते थे।

धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में भी अहम योगदान

राजनीति के अलावा धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में भी उनकी विशेष रुचि रही। वे झारखंड धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष पद पर भी रहे, जहां उन्होंने कई धार्मिक संस्थानों के बेहतर संचालन और पारदर्शिता को लेकर कार्य किया। धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता के प्रति उनका दृष्टिकोण बेहद सकारात्मक था।

सादगी और ईमानदारी की मिसाल

माधव लाल सिंह को राजनीति में सादगी और ईमानदारी की मिसाल माना जाता था। वे बिना किसी दिखावे के सीधे लोगों से मिलते थे और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते थे। गोमिया के ग्रामीण इलाकों में उनकी लोकप्रियता काफी अधिक थी। समर्थकों का कहना है कि वे हमेशा सहज, सरल और जमीन से जुड़े नेता रहे।

उनके करीबी लोगों के अनुसार, राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बावजूद उन्होंने कभी व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता नहीं दी। यही वजह रही कि विपक्षी दलों के नेता भी उनका सम्मान करते थे।

नेताओं और समर्थकों ने जताया शोक

माधव लाल सिंह के निधन की खबर मिलते ही विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और समर्थकों ने गहरा दुख व्यक्त किया। कई नेताओं ने कहा कि उनके जाने से झारखंड की राजनीति ने एक अनुभवी और जनप्रिय नेता खो दिया है।

गोमिया और आसपास के क्षेत्रों में उनके समर्थकों के बीच शोक का माहौल है। लोगों ने उन्हें गरीबों और आम जनता की आवाज़ बताकर श्रद्धांजलि अर्पित की। समर्थकों ने कहा कि “माधो बाबू” का जीवन जनसेवा को समर्पित था और उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी। वे पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और रांची के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।

उनके निधन को लोग राजनीति के एक युग का अंत मान रहे हैं। झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक स्मृतियों में माधव लाल सिंह का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

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